ऑनलाइन एक्जाम के खिलाफ डॉ उदित राज का बड़ा बयान कहा- यह विद्यार्थियों के साथ अन्याय


दिल्ली विश्वविद्यालय परीक्षा कराने के लिए अमादा है और इसका इरादा विद्यार्थियों कि भलाई नही बल्कि कुछ सोफ्टवेयर कंपनियों को फायदा पहुचना है . प्रशासन द्वारा कहा गया है कि आगामी सिताम्बर तक परीक्षा हो इसके लिए दो तरीका सुझाया है . पहला ओपन बुक एक्जाम {आनलाइन} और दूसरा ऑफ लाइन .इसका ये मतलब हुआ कि महामारी के खात्मे के बाद विद्यार्थी पारंपरिक तरीके से परीक्षा दे सकेंगे .
डॉ उदित राज ने विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि – यह विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. ऑनलाइन परीक्षा देने में सभी सक्षम नहीं हो सकते क्यूंकि इसके लिए लैपटॉप या स्मार्टफोन कि जरुरत पड़ेगी. आर्थिक रूप से विपन्न विद्यार्थियों के पास ये सुविधा नहीं है, हालत ये है कि हर जगह इंटरनेट भी ठीक से काम नहीं करता है हाल में जब माक एक्सरसाइज़ कि गयी तो इस दौरान साईट क्रैश कर गयी . यह भी कई बार देखा गया है कि कि प्रश्नोत्तर को अपलोड करते समय बहुत समय लग जा रहा है और साईट लोड नही संभाल पा रही है.
डॉ उदित राज ने कहा कि – यह पूर्ण रूप से अव्यवहारिक तरीका है है. मानव संशाधन मंत्रालय किसी और विकल्प को लेकर आये जिससे विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो . इन विद्यार्थियों कि मांग है कि पहले के परीक्षा परिणाम का औसत निकाल कर उनको पास कर दिया जाना चाहिए, यह एक व्यवहारिक मांग है.
डॉ उदित राज ने आगे कहा कि कोरोना कि वजह से पहले ही विद्यार्थी मुश्किल में हैं. पहले से ही बदहाल शिक्षा व्यवस्था में कोरोना कि वजह से और मुश्किलें आयी हैं. सत्र अनियमित हो गएँ हैं, नामांकन आदि कि व्यवस्था बिगड़ गयी है , पढाई बंद है ऐसे में सरकार और विवि प्रशासन का यह रवैया अन्यायपूर्ण और अव्यावाहारिक है . अगर प्रशासन अपना फ़ैसला नहीं बदलता है तो आक्रोशित विद्यार्थी इस माहौल में भी आन्दोलन कर सकते हैं.

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