सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण विरोधी फैसले के खिलाफ डॉ उदित राज 28 जून को करेंगे आरक्षण बचाओ महारैली (वर्चुअल)

1-सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण विरोधी फैसले के खिलाफ डॉ उदित राज 28 जून को करेंगे आरक्षण बचाओ महारैली (वर्चुअल)
2- उदित राज 28 जून को करेंगे आरक्षण बचाओ महारैली (वर्चुअल)
3- 28 जून को पसिसंघ कि आरक्षण बचाओ महारैली (वर्चुअल)
4- बसपा सुप्रीमो मायावती पर डॉ उदित राजा का हमला, कहा- भाजपा कि बी टीम है मायावती जी
5- डॉ उदित राज ने मायावती को आड़े हाथो लिया , आरक्षण पर चुप क्यों हैं मायावती
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण के खिलाफ दिए गए फैसले के खिलाफ परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ उदित राज ने 28 जून को आरक्षण बचाओ महारैली (वर्चुअल) के आयोजन कि घोषणा कि है . डॉ उदित राज ने बताया कि इस महारैली में पूरे देश से लाखों दलित-आदिवासी-पिछड़े-अल्पसंख्यक समाज के लोग शामिल होंगे. महारैली  एक साथ फेसबुक, ट्वीटर , यूट्यूब, ज़ूम , इन्स्ताग्राम पर लाइव प्रसारित किया जाएगा.
ज्ञातव्य हो कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों आरक्षण पर बड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें तमिलनाडु के राजनीतिक दलों ने मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी को 50 फीसदी आरक्षण दिए जाने की अपील की थी। परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह कांग्रेस के राष्ट्रिय प्रवक्ता डॉ उदित राज ने  सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण के खिलाफ दिए फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि-  क्या  न्यायपालिका संविधान से ऊपर है  या अपने आप में स्वयम्भू संस्था है जो संविधान से हटकर के कार्य कर रही है.  संविधान का अनुच्छेद 16 में आरक्षण का प्रावधान है जो कि मौलिक  अधिकार के अध्याय में है. यह कथन इसलिए सान्दर्भिक है कि तमिलनाडु के विभिन्न दलों के द्वारा याचिका  दायर की गयी थी। याचिका में विभिन्न दलों द्वारा 50 % आरक्षण मेडिकल के स्नातक, पी जी और डेंटल पाठ्यक्रमों के लिए अखिल भारतीय कोटे से तमिलनाडु के लिए छोड़ना है, लेकिन नही किया गया। राज्य के कानून के तहत पिछडों के लिए 50 % सीटें केंद्र   सरकार को छोड़ने के लिए  निर्देशित करे .इसपर सुप्रीम कोर्ट को संविधान के तहत केंद्र सरकार को निर्देशित करना चाहिए था कि पिछड़ों का आरक्षण लागू किया जाय ऐसा न करके खुद  आरक्षण के ऊपर प्रश्नचिन्ह  खड़ा करके मद्रास हाई कोर्ट भेज दिया.
दलितों के वोट और नोट पर बनी नेता सुश्री मायावती आरक्षण को ख़तम होता देख रही हैं. सी बी आई का इतना डर हो गया है कि भाजपा कि बी टीम बनकर के दलितों- पिछड़ों- अल्पसंख्यकों के हितों पर कुठाराघात करने में मदद कर रही है. आरक्षण ख़तम हो या उत्पीडन का मामला सबका एक जवाब कि जब बसपा सत्ता में आएगी तब समाधान होगा , इससे पूरी जिम्मेदारी से खुद को मुक्त कारण और चुनाव के समय सक्रीय होकर वोट मांगने के अलावा कुछ नहीं करना है. कार्यकर्ता या समाज को  हर समस्या पर टका सा जवाब दे देना कि सत्ता आएगी तब समाधान होगा. परिसंघ कि तरफ से देश में नए  जागरण के अभियान कि शुरुआत कि गयी है, जिसमे संगठित हो और भागीदारी के लिए संघर्ष करो.

डॉ उदित राज ने कहा कि संविधान के जो तीनो अंग – कार्यपालिका , न्यायपालिका  एवम विधायिका के बीच संतुलन था वह अब नहीं रहा. अनुसूचित जाति जनजाति संगठनों के परिसंघ ने आह्वान  किया है कि आगामी 28  जून को देश स्तरीय वर्चुअल रैली के जायेगी. संविधान के तहत न्यायपालिका को कानून बनाने का अधिकार नहीं है. बल्कि उसकी व्याख्या करनी है. गत दो दशक से न्यायिक सक्रियता कि आड़ में संसद से ज्यादा कानून बनाने  का काम कोर्ट कर रही है, जो असंवैधानिक है. डॉ उदित राज  ने कहा कि न्यायपालिका जातिवादी और भाई भतीजावाद वाली है. और जब भी दलित पिछड़ों से सम्बंधित आरक्षण जैसे विषय पर सुनवाई हो इन वर्गों के जज जरुर हों वरना न्याय कि जगह पर अन्याय ही होगा.
जब सरकार को कोरोना से लड़ने में ताकत झोंकनी चाहिए थी वह श्रम कानून को कमजोर कर रही थी और निजीकरण को बढ़ावा देने में लगी थी. आर्थिक पॅकेज कि घोषणा तो एक बहाना था इसके पीछे पूंजीपतियों को फायदा पहुचना और सरकारी कंपनियों को बेच कर आरक्षण ख़तम करना था. रक्षा विभाग का निगमीकरण से छोटी छोटी इकाइयाँ हो जाएँगी ताकि औने पौने दाम पर बेचा जा सके. एयरपोर्ट्स सरकार कि आमदनी है लेकिन अदानी जैसे बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुचना है. अबतक ज्यादातर सार्वजनिक कम्पनियाँ का तमाम व्यवसाय और निर्माण में एकाधिकार हुआ करता था जो सरकार कि ताकत थी और रोजगार देती थी . अब निजी क्षेत्र को भी व्यावसाय करने कि इजाजत दे डी गयी है. ताकि निजी क्षेत्र सरकारी कंपनियों से , नेताओं और अधिकारियों से साथ गाँठ करके घाटे में लाये जाय और सबका निजीकरण हो जाय. आज़ादी के समय भारत में शिक्षा 12 फीसदी थी और न सार्वजनिक कंपनिया थी न आई आई टी जैसे संस्थान. पूर्व कि सरकारों ने विवेक और मेहनत के बल पर बड़ा सरकारी क्षेत्र खड़ा किया जिसको यह सरकार २०१४ से बेचने में लगी है. यह जनता का संसाधन है और इसे बेचना उनके साथ धोखा है.
पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण जरुर मिला है, लेकिन कभी उसको पूरा नहीं किया गया . क्रीमी लेयर हटना चाहिए और पदोन्नति में आरक्षण दिया जाय. २०११ में कि गयी  जाति जनगणना का प्रकाशन बकिया जाय.
आयोजन स्थल –  नार्थ अवेन्यू ,192, नई  दिल्ली
तारीख – 28 जून 2020
समय- शाम 5 बजे
विशेष – मीडिया के साथियों से अनुरोध है कि कोरोना को ध्यान में रखते हुए मास्क, ग्लव्स और सेनेताय्जर आदि का ध्यान रखते हुए इस महारैली में उपस्थिति दें. महारैली के वीडियो , तस्वीर और ख़बरों के लिए डॉ ओम सुधा, 8789325595 से संपर्क किया जा सकता है.

राष्ट्रीय महासचिव
डॉ ओम सुधा , 8789325595 

udit raj

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