भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए बदलना होगा नजरिया – डॉ उदित राज

इतने कष्ट से देश गुजर रहा है और उस दौर में बीजेपी चुनावी रैली कर रही है। दोष बीजेपी का ही नही है कि विपक्ष , बुद्धजीवियों और धर्म निरपेक्ष ताकतों का भी । करोड़ो मजदूर किन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं , हम सभी जानते हैं।बेरोजगारी चरम पर है। सरकार ने कोई मदद नही की । चीन ने जमीन कब्जा कर लिया । अर्थव्यवस्था चौपट पहले से ही है।
वामपंथियों, बुद्धिजीवियों, अल्पसंख्यकों और सामाजिक न्याय वालों अब तो चेत लो। सेक्यूलर मैं भी हूँ लेकिन अब यह हानिकारक हो गया है। जो बुद्धिजीवी नागरिकता कानून के खिलाफ जोर जोर से बोल रहे थे , उन्हें सोचना पड़ेगा कि क्या उससे फायदा हुआ?मैं यह नही कहता कि इनका इरादा खराब है या था परंतु धर्म की काट यह नही है। एन्टी CAA आंदोलन से बीजेपी का जबरदस्त फायदा दिल्ली के चुनाव में हुआ।अब कहेंगे कि कांग्रेस ठीक से नही लड़ी । आप तो लड़े जिससे वोटों का ध्रुवीकरण और हुआ।
अगर चाहते हो कि देश मे साम्प्रदायिकता और हिटलरशाही खत्म हो तो इसकी काट खोजो। दलित – आदिवासी- पिछड़ों के अधिकार की बात करो। रोज कहो और हर जगह कि कितने मंत्री, अधिकारी, पद, जज, VC, प्रोफेसर, SP, DM, सचिव, पत्रकार, PMO में इन वर्गों के अधिकारी नियुक्त हैं पिछड़े जातियों से हैं। कितने PS /OSD इन वर्गों से मंत्रियों के पास हैं,ठेका और ऐसे दर्ज़नों चीज़ें मिल जाएंगी । जिस दिन ये काट का इस्तेमाल होने लगेगा बीजेपी सत्ता में रहेगी ही नही। Anti CAA/NPR जैसे कानून लाने लायक ही नही होंगे। इस काट से वोट मिलेगा । वोट से ही बीजेपी सत्ता में आई है और जाएगी भी उसी से ।याद रखना मेरी बात जितना तेज Anti CAA आंदोलन चलेगा उतना ही मजबूत बीजेपी और आरएसएस होंगे। लोगों की मानसिकता दूषित हो गई और वो अंधे हो रहे हैं। जाति ही काट है इसकी।

पिछड़ों के अधिकारों को कौन खत्म कर रहा है। क्या मुसलमान कर रहे हैं? UP में अभी शिक्षक भर्ती में OBC का आरक्षण खत्म किया। पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल और डेंटल यही हाल हुआ।निजीकरण से दलित और पिछड़ें ही प्रभावित होंगे।दलितों पर अत्याचार क्या मुसलमान कर रहे हैं ?आरक्षण का विरोध क्या कभी मुसलमानो ने किया ? राम मंदिर बनाने के लिए लाठी – डंडा कुर्मी, लोध, यादव, तेली , खटीक , पासी , धानुक , कोरी सभी खाये और राम जन्म भूमि ट्रस्ट बना तो 9 में से एक पिछड़ा नही।क्या मुसलमानो ने ट्रस्ट बनाया?

धर्म व्यक्तिगत मामला है और रहना भी चाहिए।राजनैतिक लोग सत्य नही बोलते और लोगों की भावना के अनुसार चलते हैं ।जिससे लोग नाराज़ न हों और वोट और सपोर्ट मिलता रहे । मुस्लिम मंच पर तो ऐसी बाते करेंगे कि जैसे की उनके जैसा कोई हितैषी ही न हो । मुस्लिम भी खुश। खरी बात यह है कि जब नागरिकता कानून के खिलाफ देश मे आंदोलन चल रहा था , बीजेपी बड़ी खुश हो रही थी। उनके लिए शाहीनबाग़ का तंबू उखाड़ना मिनटों का खेल था। वो चाहते थे कि दिल्ली विधान सभा के चुनाव तक चले। जाफराबाद में क्या हुआ? आंदोलन में जब बुरका और टोपी दिखी तो आम हिन्दू जो बीजेपी के खिलाफ थे , समर्थक बन गए । सबसे ज्यादा वोट इसबार बीजेपी को मिला। बिहार और बंगाल में चुनाव होने वाले हैं । संभल कर कदम रखना होगा।किताबी ज्ञान , बुद्धिजीवी और भाषणवाज वोट नही दिलवाते।

मुसलमानों को भी सोचना पड़ेगा कि वो भी दलित और पिछडों के मुद्दे उठाएं और शामिल हों। इस मुद्दे पर संवाद करने के लिए आप 8789325595 नम्बर पर कॉल कर सकते हैं. सुझाव भी आमंत्रित हैं.

 

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