मोदी सरकार की गलत नीतियों से देश की हालत बदतर

मोदी जी भारत मे ही नही अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यू इंडिया के निर्माण व मजबूत अर्थव्यवस्था और बुद्ध के संदेश के लिए प्रबंधन के द्वारा चर्चित व अपने देश में इनकी सरकार भारत की दैवीय-ईश्वरवादी वैदिक-सनातन तथाकथित महान संस्कृति व देश भक्ति व राष्ट्रवाद व दलित-शोषित-मजदूर-महिलाओं के विकास व सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध व समर्पित है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्याप्त कोरोना वायरस की महामारी-लॉक डाउन में केवल भारत का निर्माण करने वाले करोड़ो अप्रवासी मजदूर ईश्वरीय कृपा व सरकारी सुविधाओं व मौलिक अधिकारों से वंचित होकर भूख से मरने और तरह-तरह की अमानवीय यातनायें झेलने को विवश और मजबूर क्यों हैं ?
इस समय पूरी दुनिया के सभी देश कोरोना वायरस की महामारी व लॉक डाउन से गुजर रहे हैं । जिसमे सभी देशों के नागरिक अपने घरों में रहकर कोरोना वायरस को हराने व अपने और देश को बचाने का कार्य कर रहे हैं । लॉक डाउन का प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था पर लगातार प्रतिकूल असर पड़ रहा है । जिससे प्रत्येक देश में मंदी व बेरोजगारी की दर बढ़ी है लेकिन इस प्रतिकूल परिस्थिति में अधिकांश देश अपने नागरिकों के जीवन व आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध व समर्पित हैं और अपने देश की जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा नागरिकों की चिकित्सा व मानवीय व आर्थिक सुविधा-सुरक्षा पर खर्च रहे है जिससे नागरिकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और नागरिकों को लॉक डाउन में रखकर कोरोना को हराया जा सके ।

भारत भी कोरोना वायरस की महामारी से नही बच पाया है । मोदी जी ने जाने-अनजाने बिना देश को पर्याप्त समय दिए अचानक 24 मार्च 2020 को रात्रि में भावनात्मक रूप में देश को बचाने व कोरोना को हराने के लिए लॉक डाउन करने की अपील की और वायदा किया कि किसी नागरिक को कोई भी परेशानी नहीं होगी । सरकारी-अर्धसरकारी व संगठित निजी क्षेत्र या असंगठित निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी-अधिकारियों व मजदूर का वेतन नही काटा जाएगा । जो वेतन काटेगा उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही होगी । और जो जहां है उसे वहीं खाने की व्यवस्था की जाएगी । और मोदी जी लगातार लॉक डाउन बढ़ा रहे हैं । इस कार्य में अधिकांश सामाजिक संगठनों ने सरकार के साथ मिलकर कुछ दिन तक काम भी किया । अपने अधिकारों से अनभिज्ञ भावुक समाज व तथाकथित पढ़े लिखे कर्मचारी , अधिकारी , बुद्धिजीवी और विधायक , सांसद व मंत्रियों ने मोदी की गैर वैज्ञानिक दृष्टिकोण की अपील पर स्वास्थ्य कर्मियों के सम्मान व कोरोना को भगाने के लिए go corona , go corona के नारे लगाकर ताली-थाली बजाकर व दीपक-मोबत्ती जलाने तक का कार्य किया । कोरोना तो नही भागा लेकिन मोदी जी की सरकार में हवाई चप्पल पहनने वाले दलित , शोषित , मजदूर और गरीबों को हवाई जहाज में यात्रा करने का सपना दिखाने वाले की वादाखिलाफी व विफलता की वजह से देश के करोड़ों प्रवासी मजदूर और दलित-शोषित-गरीब आर्थिक तंगी व भूख से परेशान होकर अपने अपने गृह राज्यो को जाने के लिए पूरे देश में सड़कों व रेल की पटरियों पर, पुलिस प्रशासन के डर से इधर उधर भागने को मजबूर अवश्य हुए । सरकार की तरफ से बहुत लंबे समय तक इन्हे यातायात के साधन भी उपलब्ध नहीं कराए गए और गरीब प्रवासी मजदूर बच्चों व महिलाओं के साथ इधर उधर भटकते हुए व चलते हुए भूख ,दुर्घटना से सैकड़ों की तादात में मरते रहे । और रेल मंत्रालय व केंद्र व प्रदेशों की सरकारें अपनी एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं। मीडिया के माध्यम से कभी तब्लीगी जमात तो कभी राम मंदिर जैसे मुद्दे लाकर लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास करते रहते हैं।

प्रवासी मजदूर अपने ही देश में लगातार अमानवीय समस्याओं का सामना कर रहे है । एक गरीब मजदूर पिता की लड़की ने अपने पिता को भूखी-प्यासी रहकर तेरह सौ किलोमीटर साइकिल चलाकर अपने घर पहुंची जिस पर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की बेटी ने ट्वीट किया है और ऐसी हजारों अमानवीय घटनाओं को भारत ही नहीं पूरी दुनिया के सभी देश देख रहे है । क्या मोदी जी की मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देश ने व समाज के लिए सर्मपित सरकार ने दुनिया में भारत को शर्मसार नहीं किया है ? अथवा मोदी सरकार ने मजदूरों को पैदल चलाकर व भूखे-प्यासे रख कर आत्मनिर्भर बनाया है ?
कोरोना को भगाने और प्रवासी मजदूर , गरीब व महिलाओं की सुरक्षा के लिए न तो ईश्वरीय दैवीय शक्ति न मजबूत अर्थवस्था वाली सरकार काम आयी न ही करोड़ों की संख्या में भारत की महान संस्कृति पर गर्व करने व देश भक्ति के लिए सर्वस्व त्याग करने वाले राष्ट्रवादी भक्त मजदूरों के हित में आए । इस पर देश के बहुजन समाज के सामाजिक व राजनैतिक-प्रगतिशील और अल्पसंख्यक समाज के सभी नेताओ व दलित-आदिवासी -शोषित-गरीब-अल्पसंख्यक व महिलाओं को गहनता से विचार नहीं करना चाहिए ?

किसी भी देश का विकास , निर्माण व भविष्य धार्मिक , सामाजिक व राजनैतिक व्यवस्था पोषकों की विचारधारा व प्राथमिकताओं के आधार पर होता है । हजारों वर्षों से लेकर धार्मिक व सामाजिक व्यवस्था पोषकों की प्राथमिकता वैदिक-सनातन धर्म पर आधारित ब्राह्मणवादी , ईश्वरवादी-धर्मांधता-अन्धविश्वाश-रूढ़िवादी असमानतावादी-गैरमानवतावादी- जातिवादी व ग़ैरवैज्ञानिक दृष्टिकोण की तथाकथित महान संस्क्रति का विकास करने का प्रयास रहा है । जिससे ये देश जातियों में विभाजित होकर अशिक्षा-गरीबी-भुखमरी-सामाजिक-आर्थिक-विज्ञान और तकनीकि-प्रौद्योगिकी विकास से वंचित होकर तमाम तरह की समस्याओं से पीड़ित होकर सैकड़ों वर्ष गुलाम रहा । यथास्थितिवादी व्यवस्था की विचारधारा की मुख्य पोषक संघ परिवार ने देश के राजनैतिक स्वतंत्रता के आंदोलन के समय मे भी देश की आज़ादी में सक्रिय रूप से भाग न लेकर केवल अपनी विचारधारा का प्रचार व उसे मजबूत करने का कार्य किया । इनके ऐसे कृत्यों से तत्कालीन समय का इतिहास भरा पड़ा है ।

आजादी के बाद से ये अपनी विचारधारा को मजबूत करने में लगे रहे और बीच-बीच में गठबंधन के सहारे प्रदेशों और केंद्र की सरकार में भी आये लेकिन बहुमत के अभाव में कुछ खास नही कर पाए । लेकिन 2014 में तत्कालीन केन्द्र सरकार की उदासीनता और अम्बेडकरवादी-समाजवादी-साम्यवादी और अन्य क्षेत्रीय दलों की अधिनायकवादी-सामंतवादी -जातिवादी मानसिकता और तमाम तरह की कमियों का फायदा उठाते हुए मोदी जी ने जनता को विकास-पाकिस्तान-हिन्दू-मुस्लिम जैसे मुद्दो पर भावुक बनाकर गुमराह किया और केंद्र में प्रचंड बहुमत प्राप्त किया । 2014 से अपनी प्राथमिकता और विचारधारा के आधार पर यथास्थितिवादी धार्मिक-सामाजिक व्यवस्था व धार्मिक-सामाजिक-राजनैतिक व्यवस्था पोषकों और देश के बड़े-बड़े उद्योग व पूँजीपतियों को आर्थिक रूप व समाजिक रूप से मजबूत करने की प्रक्रिया लगातार जारी है ।

2014 से मोदी जी सरकार कम चलाते हुए प्रतीत हो रहे हैं बल्कि बहुजन समाज और बाबा साहब डॉ आंबेडकर व अन्य बहुजन समाज के महापुरुषों की विचार धारा के खिलाफ़ प्रति क्रांति ज्यादा कर रहे है । मोदी सरकार दलित-आदिवासी-पिछड़े-मुस्लिम समाज में आपस मे नफरत फैलाकर और राजनैतिक भागीदारी और आरक्षण के नाम पर विभाजित करके हमारे संवैधानिक व सामाजिक अधिकार खत्म कर रही है और हम सभी को बारी-बारी से मार-पीट-उत्पीड़न-बलात्कर-हत्या-आगजनी और सामाजिक रूप से अपमानित होने व तरह-तरह के गैर मानवीय कृत्यों सामना करना पड़ रहा है ।
कोरोना वायरस और महामारी व लॉक डाउन के समय में भी मोदी सरकार के इशारे पर न्यायपालिका दलित-आदिवासी समाज के सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लगातार खत्म करने का कार्य कर रही है । और यह सरकार डिफेंस, एयर पोर्ट, रेलवे एवं PSU सेक्टर की अन्य सरकारी कंपनियों का निजीकरण कर रही है जिस से दलित-आदिवासी समाज का स्वतः ही रोज़गार खत्म हो जाएगा और आने वाली पीढ़ी भी आरक्षण से वंचित हो जाएगी।नीट परीक्षा में देश की विशाल जनसंख्या वाले पिछड़े वर्ग से मेडिकल की मास्टर डिग्री में एक कैंडिडेट का चयन नहीं होता है । क्या ये बहुजन समाज के लिये एक बहुत ही गंभीर सवाल और चुनौती नही है ?
आर्थिक पैकेज में मजदूरों व जन धन खाता धारकों को इतनी कम राशि दी है कि ये उंट के मुंह में जीरा देने के समान है और आर्थिक सहायता के नाम पर उनका मजाक उड़ाया है । वहीं एमएसएमई के लिए राहत के नाम पर लोन देने का प्रावधान किया है न कि उन्हें कोई राहत । देश को बीमारी-महामारी से बचाने वाले व कोरोना वायरस में प्रथम पंक्ति के रूप में काम कर रहे सफाई कर्मियों का सरकारी विज्ञापन में उनके नाम का जिक्र जरूर होता है लेकिन अन्य स्वास्थ्य कर्मियों व पुलिस के समान सुविधा और आर्थिक सुरक्षा क्यों नही है ? इस तरह मोदी जी केवल देश को बेवकूफ बनाने का असफल प्रयास कर रहे है ।
मोदी सरकार में जो हमारे अधिकार और सामाजिक सम्मान का खात्मा हो रहा है उसके लिए हम बहुजन समाज के लोग ज्यादा जिम्मेदार हैं ।
डॉ आंबेडकर के परिनिर्वाण के बाद बहुजन समाज के अदूरदर्शी जातिवादी-सामंतवादी तथाकथित अधिकांश अम्बेडकरवादी नेताओं ने बाबा साहब और बहुजन समाज व प्रगतिशील विचारधारा के महापुरुषों की व्यवस्था परिवर्तन और मानवतावादी व वैज्ञानिक दृष्टिकोण व सामाजिक-संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष की विचारधारा को सही रूप में समाज के सामने प्रस्तुत नहीं किया न ही तर्कसंगत समाज बनाया बल्कि बहुजन समाज या जाति की जनसंख्या को अपनी निजी पूंजी मानकर अपने हित व राजनैतिक सत्ता के लिए एक तरफ बाबा साहब की विचारधारा की आड़ में अपनी सुविधानुसार कथा वाचकर और दूसरी तरफ राजनैतिक सत्ता का सपना दिखाकर भावनात्मक समाज बनाया और गुमराह करने का गैरजिम्मेदार कार्य किया । जिससे अपरोक्ष रूप से मनुवादी विचारधारा को मजबूती मिलती रही और बहुजन समाज सही दिशा के अभाव में कमजोर होता गया । इसके लिए अधिकांश जातिवादी सामंतवादी तथाकथित सामाजिक-राजनैतिक नेता कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं । सत्ता का मतलब केवल राजनैतिक सत्ता ही नहीं है बल्कि देश के विभिन्न संस्थाओं और संसाधनों में भागीदारी भी है जिस से समाज का सही निर्माण होता है और बाबा साहब की विचारधारा का प्रचार प्रसार करने का बल मिलता है। क्योंकि अभी तक तथागत गौतम बुद्ध और बाबा साहब की विचारधारा को दलित-आदिवासी समाज के कर्मचारी-अधिकारियों ने ही आगे बढ़ाया है ना कि किसी तथाकथित अम्बेडकरवादी राजनैतिक दल ने।

परिसंघ राष्ट्रीय स्तर पर आरक्षण बचाने व कर्मचारी-अधिकारियों के अधिकारों और बाबा साहब की विचारधारा को सही रूप में प्रस्तुत करने के लिए जाना जाता है। परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ उदित राज व वरिष्ठ पदाधिकारी इस वैश्विक महामारी व लॉक डाउन में भी मोदी सरकार की नीतियों से तथागत गौतम बुद्ध- डॉ अम्बेडकर व बहुजन महापुरुषों की विचारधारा व दलित-आदिवासी समाज का सरकारी नौकरियों में समाप्त हो रहे आरक्षण व बहुजन समाज के भविष्य को देखते हुए उसे बचाने के लिए लॉक डाउन में सोशल मीडिया के माध्यम से दलित-आदिवासी-पिछड़े-मुस्लिम व प्रगतिशील विचारधारा के लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर जागृत करने और तर्कसंगत समाज बनाने का लगातार कार्य कर रहे हैं । ताकि लॉक डाउन के बाद सुप्रीम कोर्ट और सरकार का घेराव किया जा सके । ऐसी परिस्थिति में दलित-आदिवासी-मुस्लिम व प्रगतिशील विचारधारा के लोगों जाति-पांति-धर्म-राजनीति से ऊपर उठकर व आपसी मतभेदों को भुलाकर आदान-प्रदान के रास्ते को अपनाकर अपने अधिकारों व सम्मान जनक भविष्य के लिए एकत्रित होकर लॉक डाउन के बाद सुप्रीम कोर्ट और सरकार का घेराव करने में तन-मन-धन से सहयोग करना चाहिए । जिससे सरकार पर दबाब बनाकर हम अपने अधिकारों को प्राप्त करके अपने भविष्य को सुरक्षित रख सकें ।

विनोद कुमार
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
परिसंघ नेतृत्व डॉ उदित राज
मो-9871237186

 

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